Monday, 7 July 2014

कलयुग में मासूमों को परोसा जा रहा है विषैला दान




बहुत अजीब सा है यह समय जब इंसानियत नाम ही स्वार्थ, निर्दयता का पर्यायवाची बन के रह गया है। आजकल तो दुनिया में भगवान का रुप कहे जाने वाले, सबसे मासूम व निर्दोष माने जाने वाले बच्चों को मिड-डे के रुप में विषैला खाना खिलाया जा रहा है । सरकार की सुनें तो अक्सर ये मिड डे मील ऐसे बच्चों को दिया जाता है जो बेचारे बदकिस्मती से गरीब घरों में जन्में हैं जिन्हें दो वक्त की रोटी भी नसीब में नहीं होती है। हमारी संस्कृति और हमारे मानवीय व्यवहार के अंतर्गत हमारा यह कर्तव्य है कि हम ऐसे लाचार बच्चों को जीवन की मूलभूत आवश्यकताएं तो मुहैया करवाएं। बहुत ढोल पीट पीट कर ऐसे दिखावे किए जाते हैं कि कितना कुछ किया जा रहा है । पर यह क्या कंकड़ तो हमारी दाल और चावल में भी कभी-कभी निकल ही जाते हैं पर यहां तो मासूम बच्चों को चूहे, छिपकलियां और तो और कॉकरोच परोस-परोस कर दिए जा रहे हैं । जब अपने बच्चों को खिलाने का सोचते हैं तो दुनिया भर की सारी हाईजनिक बातों का ख्याल आता है न हर घर में आरो किस के लिए लगवाते हैं आप, अपने नन्हें मुन्हों का कितना ध्यान रखते हैं हम सभी। इन बच्चों को आप भूखा ही रहने दीजिए। पानी पीकर भी कुछ दिन तो इन्हें राहत मिल ही सकती है पर अरे यह क्या आप तो उन्हें खाने के नाम पर छिपकलियां और चूहे खिला-खिला कर मारने पर ही अतारू हो गए हैं। इन्हें नहीं चाहिए आपका विषैला दान। गरीब ही सही ये सभी अपनी मां की आंख के तारे हैं। हमारे देश का सुनहरा भविष्य हैं जब ईश्वर का रुप समझे जाने वाले इन मासूमों का यह हाल है तो सोचिए हमारे जैसे आम लोगों के साथ क्या हो सकता है हमारे देश में--------------मीनाक्षी   7-07-14




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